Friday, August 21, 2009

तेरा ख्याल






हर घड़ी किसी की याद रहती है दिल में
हर घड़ी किसी की चाह रहती है दिल में
कुछ ख्वाहिशें हैं दबी सी
दस्तकें जो बार बार देती हैं दिल में ||

क्यों याद करते है उन पलों को
जो सब कुछ भुला देती हैं
क्या वजूद है उनका
जो बार बार गम का परवान चढाती हैं दिल में ||

हम तो वफ़ा करके भी तड़पे
वो बेवफाई करके भी खफ़ा हैं
खता हमने क्या की
कसक जिसकी बार बार उठती है दिल में ||

अब तो उम्मीद भी ना बाकी कोई
बस जीयें जाते हैं
इस नाउमीदी में भी लेकिन
तेरा ख्याल बार बार आता है दिल में ||

अब तो विनोदी समझाता है यही
न आने दे उन ख्यालों को
जो चोट पहुंचाती हैं बार बार दिल में
जो जख्म हरा कर जाती है बार बार दिल में ||

-विनय 'विनोद' द्वारा रचित

2 comments:

  1. dude.. really, i think u sud change ur profession to poet rather than wasting ur valuable talent in technical things.. master poetry, i must say...

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  2. thanx 4 ur kind suggestion bro!
    blogging is nothing but my first step 2wards this cause only.

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